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जानिए कैसे पहुँचा एक पानीपूरी बेचने वाला टीम इंडिया में ,यशस्वी जायसवाल के संघर्ष की कहानी

मुंबई एक ऐसा जगह है जहां लोग अपने सपनों को पूरा करने और अपने सपने साकार करने के लिए जाते हैं। मुंबई को सपनों का शहर भी कहा जाता है।

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सपनों के शहर मुंबई के आजाद मैदान में एक क्रिकेट क्लब है। मुस्लिम यूनाइटेड क्लब इसके ग्राउंड मैन के साथ एक लड़का 3 साल तक टेंट में रहा। इससे पहले वह एक दूध की डेरी में रहता था डेरी वाले ने से किसी काम का ना समझ कर बाहर निकाल दिया था। इतना कुछ होने के बावजूद यह लड़का आज इंडिया की अंडर-19 टीम का हिस्सा है। हम जिस क्रिकेटर की बात कर रहे हैं उनका नाम है यशस्वी जायसवाल।

यशस्वी उत्तर प्रदेश के भदोही में एक छोटे से दुकानदार के बेटे हैं और उसने बचपन में ही तय कर लिया था कि वह बड़ा होकर एक क्रिकेटर बनेगा। जब यशस्वी 10 साल के थे।तब वह अपने पिता से जिद कर के मुंबई में एक रिश्तेदार के घर रहने लगे। पिता ने सोचा कि यह कुछ करके अपना पेट पाल ही लेगा। रिश्तेदार के यहां जगह की कमी की वजह से यशस्वी का सोने का इंतजार एक डेयरी में कर दिया गया था।बात यह हुई कि उन्हें डेयरी में काम भी करना पड़ेगा।

जब डेरी वाले ने यशस्वी को निकाल दिया तब उन्हें आजाद मैदान के इस्थित मुस्लिम यूनाइटेड क्लब ग्राउंड मेन इब्राहम ने सहारा दिया इब्राहिम के साथ 3 साल टेंट में रहें। पिता कभी-कभी कुछ पैसे भेज दिया करते थे। लेकिन उससे यशस्वी का गुजारा नहीं हो पाता था तब उन्होंने रामलीला के दौरान पानी पूरी बेचना शुरू कर दिया।

आपको बता दें यशस्वी की किस्मत तब चमकी जब उस पर कुछ ज्वाला सिंह की नजर पड़ी यशस्वी लेफ्ट हैंड बैट्समैन है और राइट आर फास्ट बॉलर है। यशस्वी प्रीमियर लीग में अजिंक्य रहाणे की टीम से भी खेले थे। यशस्वी जायसवाल एक चाल में रहते है वह इसे महल मानते है। यशस्वी कहते हैं कि जो बंदा 3 साल तक टेंट में रहा हो उसके लिए यह घर किसी महल से कम नहीं है। यशस्वी जायसवाल फिलहाल अंडर-19 टीम का हिस्सा है वही टीम जिसमें सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर को भी जगह मिली है।

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